राजस्थान में पे-प्रोटेक्शन विवाद में नया मोड़: वित्त विभाग के आदेश के बाद शुरू हुई रिकवरी, माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सरकार से मांगा मार्गदर्शन

अपडेट तिथि: 18 जून 2026 | विभाग: माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर एवं वित्त विभाग, राजस्थान

जयपुर/बीकानेर। राजस्थान प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर राज्य सेवा में सीधी भर्ती के जरिए आने वाले कर्मचारियों के वेतन को लेकर आ रही है। यदि आप राजस्थान के किसी सार्वजनिक उपक्रम (PSU), स्वायत्तशासी निकाय, लोकल बॉडी या पंचायती राज संस्थान में कार्यरत हैं और अब सीधी भर्ती के जरिए शुद्ध रूप से सरकारी सेवा (Government Service) में आने का सपना देख रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

राजस्थान सरकार के वित्त विभाग ने पूर्व में एक बेहद कड़ा और स्पष्ट परिपत्र जारी करते हुए साफ कर दिया था कि ऐसे कर्मचारियों को सरकारी नौकरी में आने पर उनके पिछले वेतन का संरक्षण यानी 'पे प्रोटेक्शन' (Pay Protection) का लाभ कतई नहीं दिया जाएगा। इस आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में खलबली मची हुई थी, लेकिन अब इस पूरे मामले में एक नया मोड़ आ गया है।

शिक्षा विभाग में रिकवरी के आदेश और शिक्षक संघों का विरोध

वित्त विभाग के आदेशों और सेवा अभिलेखों की जांच के क्रम में शिक्षा विभाग के अधीनस्थ कार्यालयों द्वारा उन तृतीय श्रेणी अध्यापकों (लेवल-1 व लेवल-2) के खिलाफ वसूली (Recovery) और वेतन कटौती के आदेश जारी किए जा रहे हैं, जिन्होंने पूर्व में अन्य सरकारी सेवा में चयनित होने पर पे-प्रोटेक्शन का लाभ उठा लिया था। इसके विरोध में विभिन्न शिक्षक संघों द्वारा इस रिकवरी को रोकने के लिए निदेशालय को लगातार ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने पत्र लिखकर उठाए मजबूत तर्क

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कार्यालय निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान (बीकानेर) के निदेशक सीताराम जाट (IAS) ने श्रीमान संयुक्त शासन सचिव, शिक्षा (ग्रुप-2) विभाग को एक विस्तृत पत्र भेजकर इस विषय पर मार्गदर्शन मांगा है। निदेशक ने अपने पत्र में शिक्षकों के पक्ष में कई महत्वपूर्ण बिंदु और वैधानिक तथ्य सामने रखे हैं:

  • शिक्षा विभाग ही है पैतृक विभाग: पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भले ही इन शिक्षकों का चयन पंचायती राज नियमों के तहत विभिन्न भर्ती एजेंसियों के माध्यम से जिला परिषदों द्वारा किया जाता है, लेकिन इन तृतीय श्रेणी अध्यापकों का मूल और पैतृक विभाग 'शिक्षा विभाग' ही है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा वर्ष 2011 में जारी आज्ञा में भी प्रारंभिक शिक्षा स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन ही रखने की व्यवस्था दी गई थी।
  • समस्त प्रशासनिक नियंत्रण: इन अध्यापकों का स्थायीकरण जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) द्वारा किया जाता है, वरिष्ठता का संधारण इसी स्तर पर होता है और इनकी पदोन्नति भी शिक्षा विभाग के अधीन ही वरिष्ठ अध्यापक के पदों पर की जाती है।
  • पेंशन और वित्तीय लाभ: इन शिक्षकों के चयनित वेतनमान, एसीपी (ACP) और एमएसीपी (MACP) के मामले जिला शिक्षा अधिकारी स्तर पर ही स्वीकृत होते हैं। इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्ति के समय पेंशन की गणना हेतु भी इनके द्वारा तृतीय श्रेणी अध्यापक के रूप में की गई पूर्व सेवा को पूरी तरह शामिल किया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला और क्यों लिया गया था मूल फैसला?

दरअसल, वित्त विभाग ने अपने पूर्व के परिपत्रों में यह स्पष्ट किया था कि राज्य के PSUs, स्वायत्तशासी निकायों, स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं आदि के कर्मचारी तकनीकी रूप से 'सरकारी सेवक' नहीं हैं। इसलिए, नियमित सरकारी सेवा में सीधी भर्ती द्वारा आने पर राजस्थान सेवा नियम, 1951 (RSR, 1951) के नियम 24 और नियम 26 के तहत पिछला वेतन सुरक्षित करने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।

इन कर्मचारियों पर पड़ रहा है सीधा असर

सरकार के इस आदेश का सीधा प्रभाव वर्तमान में निम्नलिखित संस्थाओं में कार्य कर रहे उन कार्मिकों पर पड़ रहा है जो नई सरकारी नौकरी में चयनित हुए हैं:

संस्था का प्रकार प्रभावित होने वाले संभावित कर्मचारी (उदाहरण) पे प्रोटेक्शन की स्थिति
राज्य के PSUs रोडवेज (RSRTC), विद्युत वितरण निगम (JVVNL आदि), रीको (RIICO) अमान्य (नहीं मिलेगी)
स्वायत्तशासी निकाय विभिन्न विकास प्राधिकरण (JDA आदि), राज्य स्तरीय बोर्ड और अकादमियां अमान्य (नहीं मिलेगी)
स्थानीय निकाय नगर निगम, नगर परिषद, नगरपालिकाएं अमान्य (नहीं मिलेगी)
पंचायती राज संस्थाएं जिला परिषद, पंचायत समितियां, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक शिक्षक बीकानेर निदेशालय द्वारा मार्गदर्शन अपेक्षित

निष्कर्ष: सरकार के अंतिम मार्गदर्शन का इंतजार

माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा उठाए गए इन तर्कों के बाद अब यह गेंद पूरी तरह से राज्य सरकार के पाले में चली गई है। निदेशालय ने स्पष्ट पूछा है कि क्या वित्त विभाग का यह नियम उन पूर्व तृतीय श्रेणी अध्यापकों पर भी लागू माना जाएगा जो बाद में सीधी भर्ती से राज्य सरकार की अन्य सेवाओं में चले गए हैं। जब तक सरकार का अंतिम स्पष्टीकरण नहीं आता, तब तक शिक्षा विभाग में रिकवरी की कार्रवाइयों को लेकर संशय की स्थिति बनी रहेगी।

आधिकारिक दस्तावेज डाउनलोड करें (PDF Documents)

इस पूरे प्रकरण से जुड़े दोनों महत्वपूर्ण आधिकारिक आदेशों की प्रति नीचे दिए गए बटनों के माध्यम से डाउनलोड की जा सकती है: