Income Tax Notice U/S 143(2) in June 2026! Why Are Taxpayers Suddenly Receiving Scrutiny Notices?

टैक्सपेयर्स के बीच मचा हड़कंप – आखिर जून महीने में ही इतने नोटिस क्यों आ रहे हैं?

पिछले कुछ दिनों में, पूरे भारत से कई करदाताओं (Taxpayers) ने आयकर अधिनियम की धारा 143(2) [Section 143(2)] के तहत नोटिस मिलने की सूचना दी है। जैसे ही लोग आयकर विभाग का यह नोटिस देखते हैं, उनमें घबराहट और डर का माहौल बन जाता है। सोशल मीडिया पर भी लगातार दावे किए जा रहे हैं कि लाखों लोगों को स्क्रूटनी (Scrutiny) के नोटिस भेजे जा रहे हैं।

लेकिन यहाँ सबसे बड़ा सवाल यह उठता है: "अगर मैंने अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) महीनों पहले फाइल कर दिया था, तो मुझे अब जून 2026 में नोटिस क्यों मिल रहा है?"

यही वह बात है जो हर टैक्सपेयर जानना चाहता है। इसका जवाब आयकर अधिनियम के एक बेहद महत्वपूर्ण और छिपे हुए कानूनी नियम (Statutory Deadline) में छिपा है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। घबराने से पहले आइए आसान भाषा में समझते हैं कि असल में क्या हो रहा है और क्या आपको वाकई चिंता करने की जरूरत है या नहीं।


जून 2026 में नोटिसों की बाढ़ आने की असली वजह (The Hidden Reason)

ज्यादातर करदाताओं को यह नहीं पता होता कि आयकर विभाग अपनी मर्जी से कभी भी स्क्रूटनी का नोटिस जारी नहीं कर सकता। विभाग के लिए कानूनन एक निश्चित समयसीमा तय की गई है।

निर्धारण वर्ष (Assessment Year - AY) 2025-26 के लिए फाइल किए गए रिटर्न के लिए, विभाग केवल इस तारीख तक ही धारा 143(2) का नोटिस जारी कर सकता है:

🎯 30 जून 2026

यह तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। अगर आयकर विभाग AY 2025-26 के लिए आपके रिटर्न की विस्तृत जांच (Scrutiny) करना चाहता है, तो उसे हर हाल में 30 जून 2026 से पहले नोटिस जारी करना होगा। जैसे-साथ यह अंतिम तिथि नजदीक आती है, विभाग अपनी रिस्क असेसमेंट प्रक्रिया को तेजी से पूरा करता है और चुने हुए मामलों में नोटिस जारी करता है। यही मुख्य कारण है कि जून 2026 के दौरान अचानक टैक्सपेयर्स को भारी संख्या में स्क्रूटनी नोटिस मिल रहे हैं।


आखिर धारा 143(2) के तहत मिलने वाला नोटिस क्या है?

धारा 143(2) का नोटिस तब जारी किया जाता है जब आयकर विभाग आपके द्वारा दाखिल किए गए रिटर्न (ITR) को गहन जांच (Detailed Examination) के लिए चुनता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सत्यापित करना होता है कि:

  • क्या आपने अपनी आय (Income) को सही तरीके से घोषित किया है?
  • क्या क्लेम की गई कटौतियां (Deductions) कानूनी रूप से सही हैं?
  • क्या टैक्स छूट (Exemptions) पूरी तरह वास्तविक हैं?
  • क्या कैपिटल गेन्स (Capital Gains) को सही ढंग से रिपोर्ट किया गया है?
  • क्या विभाग के पास मौजूद डेटा आपके द्वारा भरे गए रिटर्न से पूरी तरह मेल खाता है?

ध्यान दें: स्क्रूटनी नोटिस मिलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपने टैक्स चोरी की है या कोई आय छुपाई है। इसका सीधा मतलब सिर्फ इतना है कि विभाग कुछ जानकारियों का अतिरिक्त वेरिफिकेशन (सत्यापन) करना चाहता है।


आपका रिटर्न स्क्रूटनी के लिए क्यों चुना गया? (Top Reasons)

कई टैक्सपेयर्स को लगता है कि एक बार रिटर्न प्रोसेस होने के बाद उनकी जिम्मेदारी खत्म हो गई। लेकिन अब ऐसा नहीं है। आयकर विभाग अब हाई-रिस्क मामलों की पहचान करने के लिए एडवांस डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल करता है।

इन 6 मुख्य कारणों से आपको धारा 143(2) का नोटिस मिल सकता है:

1. AIS और ITR में मिसमैच (Mismatch): आज के समय में स्क्रूटनी का सबसे बड़ा कारण आपके Annual Information Statement (AIS), Form 26AS और आपके द्वारा दाखिल किए गए ITR के बीच का अंतर है। एक छोटा सा मिसमैच भी सिस्टम द्वारा फ्लैग कर दिया जाता है।

2. हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन (High-Value Transactions): यदि आपने बैंक में बड़ा कैश डिपॉजिट किया है, बड़ी प्रॉपर्टी डील की है, भारी इन्वेस्टमेंट किया है, क्रेडिट कार्ड से ज्यादा खर्च किया है या विदेशी प्रेषण (Foreign Remittance) किया है, और यह आपकी घोषित आय से मेल नहीं खाता, तो नोटिस आ सकता है।

3. प्रॉपर्टी की बिक्री और कैपिटल गेन्स: जिन करदाताओं ने जमीन, मकान, कमर्शियल प्रॉपर्टी, शेयर्स या म्यूचुअल फंड बेचे हैं और यदि उनका कैपिटल गेन टैक्स सही ढंग से रिपोर्ट नहीं हुआ है, तो उनका केस स्क्रूटनी के लिए चुना जा सकता है।

4. बड़े रिफंड क्लेम और फर्जी कटौतियां: यदि किसी रिटर्न में बहुत बड़ा रिफंड क्लेम किया गया है या धारा 80C, 80D आदि के तहत असामान्य या बिना सबूत के टैक्स छूट का दावा किया गया है, तो अंतिम स्वीकृति से पहले विभाग उसकी अतिरिक्त जांच करता है।

5. बिजनेस में बड़ा नुकसान या असामान्य दावे: यदि आपका बिजनेस बड़ा घाटा (Business Loss) दिखा रहा है, बहुत अधिक डिडक्शन क्लेम कर रहा है या मुनाफा असामान्य रूप से बेहद कम है, तो यह जांच का कारण बन सकता है।

6. विदेशी संपत्ति और विदेशी आय: विभाग ने अब विदेशी निवेश, विदेशी बैंक खातों और अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन की निगरानी बहुत सख्त कर दी है। इसमें किसी भी तरह की अधूरी जानकारी मिलने पर सीधे स्क्रूटनी शुरू हो जाती है।


क्या नोटिस मिलने का मतलब है कि आपने कुछ गलत किया है?

बिल्कुल नहीं! यह टैक्सपेयर्स के बीच फैला सबसे बड़ा भ्रम है। स्क्रूटनी नोटिस का मतलब केवल यह है कि विभाग कुछ जानकारियों को पुख्ता करना चाहता है। हर साल हजारों पूरी तरह ईमानदार और सही टैक्सपेयर्स को भी यह नोटिस मिलता है और वे केवल अपने सहायक दस्तावेज (Supporting Documents) ऑनलाइन जमा करके आसानी से इस प्रक्रिया को पूरा कर लेते हैं। इसलिए इसे किसी गलती का सबूत न लिखें।


नोटिस मिलने के बाद क्या प्रक्रिया होती है? (Step-by-Step)

यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और **फेसलेस असेसमेंट सिस्टम (Faceless Assessment System)** के जरिए होती है। आपको किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं काटने पड़ते। आपको बस इन स्टेप्स का पालन करना होता है:

  1. स्टेप 1: इनकम टैक्स के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें।
  2. स्टेप 2: 'e-Proceedings' सेक्शन में जाकर आए हुए नोटिस और प्रश्नावली (Questionnaire) को ध्यान से देखें।
  3. स्टेप 3: मांगे गए विवरण के अनुसार अपने सभी संबंधित दस्तावेज और बैंक स्टेटमेंट्स इकट्ठा करें।
  4. स्टेप 4: पोर्टल के माध्यम से ही अपना लिखित स्पष्टीकरण और डाक्यूमेंट्स ऑनलाइन सबमिट करें।
  5. स्टेप 5: सुनिश्चित करें कि आप नोटिस में दी गई तय समयसीमा के भीतर ही जवाब दे दें।

जांच के दौरान कौन से डाक्यूमेंट्स मांगे जा सकते हैं?
केस के आधार पर विभाग आपसे बैंक स्टेटमेंट, प्रॉपर्टी सेल/परचेज डीड, कैपिटल गेन कैलकुलेशन शीट, बुक्स ऑफ अकाउंट्स, GST रिकॉर्ड्स, लोन कन्फर्मेशन या इन्वेस्टमेंट प्रूफ मांग सकता है।


क्या धारा 143(2) के नोटिस को अनदेखा किया जा सकता है?

इसका सीधा और साफ जवाब है—नुकसानदेह साबित हो सकता है! यदि आप इस नोटिस का जवाब नहीं देते हैं, तो विभाग:

  • आपकी अनुपस्थिति में खुद के अनुमान से टैक्स का निर्धारण (Best Judgment Assessment) कर सकता है।
  • आपकी आय में मनमाना इजाफा (Addition of Income) कर सकता है।
  • आप पर भारी टैक्स डिमांड, ब्याज और पेनल्टी (जुर्माना) लगा सकता है।

इसलिए, हर नोटिस की समीक्षा गंभीरता से करें और समय पर ऑनलाइन जवाब दाखिल करें।


महत्वपूर्ण टाइमलाइन जो हर टैक्सपेयर को याद रखनी चाहिए

विवरण (Particulars) जानकारी (Details)
वित्तीय वर्ष (Financial Year) 2024-25
निर्धारण वर्ष (Assessment Year) 2025-26
नोटिस U/S 143(2) जारी करने की अंतिम तिथि 30 जून 2026

यही वह समयसीमा है जो यह साफ करती है कि आखिर जून 2026 के इस महीने में अचानक स्क्रूटनी नोटिसों की संख्या में इतनी तेजी क्यों आई है।


सबसे बड़ी सीख (Conclusion)

यदि आपको धारा 143(2) के तहत नोटिस मिला है, तो घबराएं नहीं। यह टैक्स चोरी का आरोप नहीं है, बल्कि 30 जून 2026 की कानूनी समयसीमा खत्म होने से पहले विभाग द्वारा की जा रही एक सामान्य प्रक्रिया है। नोटिस को ध्यान से पढ़ें, अपने डाक्यूमेंट्स को व्यवस्थित करें और सही समय पर एक सटीक जवाब ऑनलाइन पोर्टल पर सबमिट कर दें। सही दस्तावेज और समय पर कम्प्लायंस ही स्क्रूटनी प्रक्रिया को आसानी से पार करने की असली चाबी है।


📋 महत्वपूर्ण टैक्स टूल्स और आपके लिए उपयोगी लिंक्स

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या धारा 143(2) के तहत नोटिस मिलना गंभीर बात है?
हाँ, इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए और तय समय पर जवाब देना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपने कुछ गलत या अवैध किया है।

Q2. जून 2026 में ही इतने सारे टैक्सपेयर्स को नोटिस क्यों मिल रहे हैं?
क्योंकि निर्धारण वर्ष (AY) 2025-26 के लिए स्क्रूटनी नोटिस जारी करने की कानूनी रूप से अंतिम तारीख 30 जून 2026 है। समयसीमा समाप्त होने से पहले विभाग पेंडिंग मामलों को प्रोसेस कर रहा है।

Q3. क्या स्क्रूटनी की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन की जा सकती है?
जी हाँ, लगभग सभी स्क्रूटनी कार्यवाहियां अब आयकर विभाग के पूरी तरह से सुरक्षित 'Faceless Assessment Mechanism' के माध्यम से ऑनलाइन ही संचालित की जाती हैं।

Q4. क्या इस प्रक्रिया में कोई चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) मेरा प्रतिनिधित्व कर सकता है?
जी हाँ। आप आयकर पोर्टल पर अपने अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में किसी योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) को नियुक्त कर सकते हैं, जो स्क्रूटनी कार्यवाही में आपकी मदद कर सकते हैं।

Q5. नोटिस मिलने के तुरंत बाद मुझे सबसे पहले क्या करना चाहिए?
बिना घबराए सबसे पहले इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉगिन करें, नोटिस और उसके साथ आई प्रश्नावली (Questionnaire) को ध्यान से पढ़ें, संबंधित डाक्यूमेंट्स एकत्र करें और एक स्पष्ट व सटीक टाइमली रिस्पॉन्स तैयार करें।