राजस्थान राजकीय कार्मिक: सेवा नियम, मृत्यु उपरांत लाभ एवं अनुकम्पा नियुक्ति गाइड

RSR - Probation Rules, Death Benefits & Compassionate Appointment Policy


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भाग 1: मृत्यु उपरांत मिलने वाले वित्तीय क्लेम, सुविधायेँ एवं प्रक्रिया

(1) मुख्य विभागीय खाते एवं क्लेम

  • राज्य बीमा / जीपीएफ / NPS क्लेम: कार्मिक के इन खातों में जमा कुल राशि का भुगतान नियमानुसार किया जाता है।
  • सामूहिक दुर्घटना बीमा (GIS): यदि मृत्यु दुर्घटना में हुई है, तो कार्मिक द्वारा दिए गए GPA के प्रस्ताव के अनुसार- ₹3 लाख / ₹10 लाख / ₹20 लाख / ₹30 लाख का क्लेम नॉमिनी को देय होता है।
  • शिक्षा विभाग विशेष सहायता: यदि मृतक शिक्षा विभाग के कार्मिक हैं, तो हितकारी निधि से ₹1.50 लाख एवं शिक्षक कल्याण कोष से सहायता के रूप में ₹5,000 की राशि का क्लेम।

(2) कोविड-19 अनुग्रह राशि

कोविड-19 की ड्यूटी में संक्रमण से कार्मिक की मृत्यु होने पर ₹50 लाख की अलग से अनुग्रह राशि का क्लेम मिलता है।

विशेष नोट: इस योजना में राज्य सरकार के समस्त अधिकारी, कर्मचारी, संविदा कर्मचारी एवं मानदेय पर कार्यरत कर्मचारियों को भी कवर किया गया है।

(3) पेंशन, ग्रेच्युटी एवं उपार्जित अवकाश

  • पारिवारिक पेंशन व ग्रेच्युटी: कार्मिक की मृत्यु के बाद नियमानुसार पारिवारिक पेंशन एवं ग्रेच्युटी के भुगतान हेतु पेंशन कुलक (Pension Case) तैयार कर पेंशन विभाग (संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय) को भेजा जाता है।
  • शेष उपार्जित अवकाश (PL): शेष उपार्जित अवकाशों के नकद भुगतान के लिए बजट आवंटन हेतु परिवार पेंशन कुलक के साथ निर्धारित प्रपत्र में मांग पत्र भेजा जाता है।

(4) बैंक एवं निजी नीतियां

  • सैलरी बैंक A/C पर यदि कोई बीमा पॉलिसी ली हुई है तो उसका क्लेम।
  • वेतन से या निजी स्तर पर कोई बीमा पॉलिसी (जैसे LIC या अन्य) ली हुई है तो उसका क्लेम।

(5) आवश्यक दस्तावेज़ एवं क्लेम प्रक्रिया

आवश्यक अभिलेख: (1) निर्धारित दावा प्रपत्र, (2) मूल मृत्यु प्रमाण पत्र, (3) सेवा समाप्ति आदेश, (4) नॉमिनी के बैंक A/C की छाया प्रति, (5) नोटरीकृत शपथ पत्र।

क्लेम प्रस्तुत करने की प्रक्रिया:

  1. DDO के माध्यम से बीमा विभाग को जैसे SI, GPF, NPS आदि के क्लेम ऑन लाइन सब्मिट करना (SSO Portal)।
  2. DDO के माध्यम से हितकारी निधि/शिक्षक कल्याण कोष के प्रकरण माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, बीकानेर को भेजना।
  3. कोरोना ड्यूटी में संक्रमण से मृत्यु होने पर दावा प्रकरण DDO द्वारा जिला कलेक्टर के माध्यम से HOD को भेजना।
  4. बैंक या LIC के क्लेम बाबत संबंधित ब्रांच से क्लेम फॉर्म प्राप्त कर उसकी पूर्ति कर भिजवाना।

⚠️ DDO एवं कार्मिक विशेष नोट:

  • NPS कार्मिक की डेथ होने पर NPS की राशि समर्पित करने पर ही पारिवारिक पेंशन मिलती है। इन्हें नियमानुसार ग्रेच्युटी का भुगतान भी किया जाता है।
  • बकाया भुगतान नॉमिनी को किया जाता है, अतः PayManager पर पहले नॉमिनी ऐड करें एवं सब ट्रेजरी/ट्रेजरी से नॉमिनी की बैंक डिटेल्स को पहले अपडेट करावें।
  • SI/GPF/NPS/GIS आदि क्लेम के लिए DDO लॉगिन से पहले SIPF पोर्टल पर नॉमिनी की बैंक डिटेल्स (A/C नम्बर, IFSC Code) एवं नॉमिनी का शेयर हिस्सा पहले अपडेट करावें, उसके बाद ही ऑन लाइन क्लेम सब्मिट करें।

भाग 2: दो वर्ष के प्रोबेशन काल (परिवीक्षा काल) के अधिकार, भत्ते एवं अवकाश

(1) अवधि एवं नियत पारिश्रमिक

  • सीधी भर्ती से नियुक्त कार्मिक के लिए प्रोबेशन की अवधि 2 वर्ष की होगी। (चिकित्सा अधिकारियों के लिए परिवीक्षा अवधि 1 वर्ष होगी)।
  • राजकीय सेवा में नियुक्त कार्मिक को 2 वर्ष तक केवल नियत पारिश्रमिक (Fixed Remuneration) दिया जाता है, अन्य कोई भी भत्ते (DA/HRA आदि) देय नहीं होते हैं। वेतन नियतन पे-मैट्रिक्स के संबंधित लेवल के प्रथम सेल में होता है।
  • प्रोबेशन सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर प्रथम वेतन वृद्धि 1 जुलाई को अनुज्ञात की जाएगी जो प्रोबेशन पूर्ण करने की तारीख के ठीक बाद में आती है। प्रोबेशन अवधि को वार्षिक वेतन वृद्धि के लिए नहीं गिना जाता है।

(2) कटौतियां एवं पूर्व कार्मिक विकल्प

  • नियत पारिश्रमिक से राज्य बीमा (SI) की कटौती नहीं होती है। परंतु अप्रैल माह में सामूहिक दुर्घटना बीमा (GIS) की राशि व प्रत्येक माह 10% एनपीएस (NPS) / पेंशन अंशदान की कटौती होती है।
  • प्रोबेशनर ट्रेनी जो पूर्व से ही राजकीय सेवा में है, वह प्रोबेशन अवधि में पूर्व पद के वेतन (विद्यमान वेतनमान) या नियत पारिश्रमिक में से जो लाभकारी है, का विकल्प चुन सकता है। विद्यमान वेतनमान चुनने पर उसे पूर्व पद के अनुसार वार्षिक वेतन वृद्धि देय होगी।

(3) प्रोबेशन काल में अवकाश नियम

  1. प्रोबेशनर ट्रेनी को एक कैलेंडर वर्ष में 15 आकस्मिक अवकाश (CL) देय हैं (सत्र जुलाई से जून रहेगा)।
  2. प्रोबेशन अवधि में कार्मिक किसी भी प्रकार का अवकाश (PL या HPL) अर्जित नहीं करेगा। (यदि पूर्व सेवा के कारण खाते में अर्जित अवकाश बकाया हैं तो नियंत्रण अधिकारी की अनुमति से उपभोग करने पर प्रोबेशन अवधि नहीं बढ़ती है)।
  3. महिला प्रोबेशनर ट्रेनी को 180 दिन का प्रसूति अवकाश और पुरुष को 15 दिन का पितृत्व अवकाश देय है। इनके उपभोग से प्रोबेशन अवधि में कोई वृद्धि नहीं होती है।
  4. असाधारण अवकाश (EOL - अवैतनिक): 30 दिवस तक का EOL नियुक्ति अधिकारी द्वारा स्वीकृत किया जाएगा। 30 दिवस से अधिक EOL प्रशासनिक विभाग के अनुमोदन से स्वीकृत होगा। 08-08-2019 या उसके बाद 30 दिवस से अधिक EOL का उपभोग करने पर प्रोबेशन संपूर्ण अवधि के लिए आगे बढ़ता है।
  5. चाइल्ड केयर लीव (CCL): विशेष परिस्थितियों में CCL स्वीकृत किया जा सकता है, परंतु सीसीएल अवधि के समान अवधि तक प्रोबेशन काल आगे बढ़ता है।
  6. प्रोबेशनर ट्रेनी को ऐच्छिक अवकाश (RI) देय नहीं है।

(4) बोनस, पदोन्नति, ACP एवं यात्रा भत्ता

  • प्रोबेशन अवधि में कार्मिक को तदर्थ बोनस देय नहीं है। निलंबन की स्थिति में निर्वाह भत्ता देय है।
  • प्रोबेशन अवधि भविष्य में पदोन्नति (Promotion) व आश्वासित कैरियर प्रगति (ACP) के लिए सेवा अवधि की गणना हेतु पूरी तरह मान्य होती है। कार्मिक को मेडिक्लेम बीमा कवर (RGHS) भी देय है।
  • राजकीय कार्य से यात्रा करने पर T.A. on Tour में बस किराया, विराम भत्ता एवं अनुषांगिक व्यय देय है। स्थानांतरण होने पर केवल mileage allowance & incidental देय है।
  • सेवा में रहते मृत्यु या निशक्तता होने पर अंशदान सरकारी राजस्व में जमा कराने पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ परिजनों को देय होता है।

भाग 3: राजस्थान अनुकम्पा नियुक्ति नियम 1996 - विधिक सवालों का समाधान (FAQs)

पार्ट A: पात्रता एवं शर्तें

प्रश्न (1): अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आश्रित की परिभाषा बतावे जिसके अनुसार आवेदन तैयार किया जा सके?
उत्तर: नियम 2(ग) के अनुसार आश्रित में कार्मिक की पत्नी/पति, पुत्र, अविवाहित पुत्री (परित्यक्ता पुत्री भी शामिल), विधवा पुत्री एवं वैधानिक रूप से ग्रहीत दत्तक पुत्र/पुत्री को आश्रित माना जाता है।
(आदेश 31.05.2016 के अनुसार: मृतक कार्मिक का ऐसा पुत्र, जिसकी पत्नी/पुत्र/अविवाहित पुत्री पूर्व से ही सरकारी सेवा में नियोजित है, तो उस पुत्र को आश्रित नहीं माना जाएगा और उसे अनुकम्पा नियुक्ति देय नहीं होगी)। भाई या बहन आश्रित नहीं हैं।

प्रश्न (2): पति एवं पत्नी दोनों राजकीय सेवा में है। जिसमे से पति का देहांत हो चुका है तो क्या उनके दो पुत्रों में से किसी एक को नौकरी मिलेगी?
उत्तर: यदि पति-पत्नी दोनों राजकीय सेवा में है तो पति के देहांत उपरान्त किसी भी आश्रित को अनुकम्पा नियुक्ति नही मिलेगी।

प्रश्न (3): एक कार्मिक प्रोबेशन काल में अध्यापक के पद पर कार्यरत थे। उनके देहांत के उपरांत आश्रित को अनुकम्पा नियुक्ति देय होगी या नही?
उत्तर: हाँ, परिवीक्षाकाल में मृत्यु होने पर भी आश्रित को नियमानुसार अनुकम्पा नियुक्ति का लाभ देय होता है (कार्मिक विभाग आदेश 2011/2012)।

प्रश्न (4): एक अविवाहित कार्मिक का देहांत हो चुका है तो क्या उसके भाई को अनुकम्पा नियुक्ति दी जा सकती है? कार्मिक ने अपने भाई को नॉमिनी बनाया हुआ है?
उत्तर: नहीं, भाई या बहिन को आश्रित की परिभाषा में सम्मिलित नही किया गया है। अतः अनुकम्पा नियुक्ति तो देय नही होगी लेकिन अन्य परिलाभों का भुगतान नॉमिनी को किया जाएगा।

प्रश्न (5): एक कार्मिक की death हो चुकी है। उनके दो पुत्र है जिसमे से एक पुत्र राजकीय सेवा में लेक्चरर है तो क्या दूसरे पुत्र को नौकरी मिल सकती है?
उत्तर: नियम 5 के अनुसार यदि परिवार में कोई भी सदस्य केंद्र/राज्य सरकार, बोर्ड, संगठन, निगम में पहले से नियोजित है तो किसी आश्रित को नियुक्ति देय नही होगी। परन्तु जहां कार्मिक की विधवा पत्नी स्वयं के लिए आवेदन करती है, तो उसे अनुकम्पा नियुक्ति दी जाएगी। उस पर यह शर्ते लागू नही होगी।

पार्ट B: आयु, समय व पद योग्यता

प्रश्न (6): कार्मिक का 10 वर्ष का नाबालिग पुत्र है। क्या बालिग होने पर उसे नौकरी मिल सकती है?
उत्तर: नियम 8 के अनुसार न्यूनतम आयु 16 वर्ष व अधिकतम 40 वर्ष निर्धारित है (विधवा हेतु कोई ऊपरी सीमा नहीं है)। नाबालिग आश्रित के आयु में शिथिलन (छूट) का अधिकार केवल राज्य सरकार (कार्मिक विभाग) को है, जिसके लिए निर्धारित समय सीमा में उचित माध्यम से आवेदन भेजना पड़ता है।

प्रश्न (7): अनुकम्पा नियुक्ति का आवेदन कब तक भर कर देना होगा?
उत्तर: अनुकम्पा नियुक्ति हेतु आवेदन पत्र जमा करवाने के लिए 90 दिन (3 महीने) की समय सीमा निर्धारित है। कार्यालयाध्यक्ष के पास आवेदन जमा करवाकर पावती अवश्य प्राप्त करें।

प्रश्न (8): जलदाय विभाग में एक कार्मिक Work Charge पर कार्यरत थे उनकी देहांत हो चुकी है? क्या उनके आश्रित को नोकरी लग सकती है?
उत्तर: हाँ, वित्त विभाग के आदेश 19/09/2003 के अनुसार वर्क चार्ज कार्मिक की मृत्यु होने पर भी आश्रितों को नियमानुसार अनुकंम्पा नियुक्ति देय होती है।

प्रश्न (9): अनुकम्पा नियुक्ति हेतु निर्धारित योग्यता और पद के बारे में बतावे?
उत्तर:
(1) कनिष्ठ सहायक (LDC - L-5): 12वीं उत्तीर्ण एवं कम्प्यूटर कोर्स (RSCIT)। कम्प्यूटर कोर्स बाद में 2 वर्ष के प्रोबेशन काल में भी किया जा सकता है, अन्यथा परिवीक्षाकाल आगे बढ़ाया जाता है। (विधवा महिलाओं एवं निःशक्तों को टाइपिंग से छूट है, पैरों से विकलांगों को छूट नहीं है)।
(2) प्रयोगशाला सहायक (L-8): विज्ञान या कृषि संकाय से 12वीं पास।
(3) चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (L-1): साक्षर होना आवश्यक है।

प्रश्न (10): एक मृत कार्मिक का पुत्र BEd किया हुआ है। क्या उसे अध्यापक पद पर अनुकम्पा नियुक्ति मिल सकती है?
उत्तर: यदि कार्मिक की मृत्यु **पदीय कर्तव्यों के पालन के दौरान (On Duty)** हुई हो, तभी अर्हक योग्यता होने पर पे-मैट्रिक्स L-10 और L-11 (शिक्षक पद) में नियुक्ति दी जा सकती है। सामान्य प्रकरणों में केवल LDC, लैब असिस्टेंट और चतुर्थ श्रेणी के पद ही देय हैं।

पार्ट C: संतान व अन्य विशेष शर्तें

प्रश्न (11): एक मृत कार्मिक के आश्रित विवाहित पुत्र के दो से अधिक संतान है क्या उनको अनुकम्पा नियुक्ति मिल जाएगी?
उत्तर: नहीं, किसी विवाहित आश्रित के 2 से अधिक संतान होने पर वह अनुकम्पा नियुक्ति के लिए पात्र नही होगा। (यह नियम मृतक की विधवा की स्वयं की नियुक्ति के मामले पर लागू नही होगा)।

प्रश्न (12): विद्यालय में कार्यरत पंचायत सहायक की मृत्यु होने पर आश्रित को अनुकम्पा नियुक्ति मिलेगी या नही?
उत्तर: पंचायत सहायक राज्य सरकार के नियमित कार्मिक की श्रेणी में नही आते है। अतः इनके आश्रित को अनुकम्पा नियुक्ति देने का कोई प्रावधान नही है।

प्रश्न (13): मेरी नियुक्ति कनिष्ठ सहायक पद पर हुई है जबकि मैं प्रयोगशाला सहायक की योग्यता रखता हूँ। क्या अब पद बदला जा सकता है?
उत्तर: नहीं, नियम 1996 के अनुसार किसी पद पर एक बार नियुक्ति स्वीकार कर लेने एवं कार्यग्रहण (Join) कर लेने के बाद आश्रित सुविधा का उपभोग पूर्ण मान लिया जाता है। इसके पश्चात किसी भी परिस्थिति में पद परिवर्तन पर विचार नहीं किया जाएगा।

प्रश्न (14): अनुकम्पा आवेदन के साथ किन-किन दस्तावेजों और शपथ पत्रों को संलग्न करना है?
उत्तर: पूर्ण भरा आवेदन पत्र, परिवार में किसी के भी सरकारी सेवा में न होने का प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता/आयु प्रमाण पत्र, जाति/मूल निवासी/चरित्र प्रमाण पत्र, दहेज नहीं लेने का नोटेराइज्ड शपथ पत्र, धूम्रपान एवं गुटखा सेवन नहीं करने का शपथ पत्र, स्वास्थ्य एवं पुलिस सत्यापन रिपोर्ट, मूल मृत्यु प्रमाण पत्र, सेवा समाप्ति आदेश, आश्रित सदस्यों का नोटरी युक्त सहमति पत्र, आश्रितों के भरण-पोषण का शपथ पत्र, कार्यालयाध्यक्ष का अनुशंसा प्रमाण पत्र एवं आश्रित सदस्यों का आय उद्घोषणा पत्र।


लेख साभार & संकलन:
श्री दिलीप कुमार (सेवानिवृत्त व्याख्याता, सादड़ी, जिला-पाली)
एवं श्री परमानन्द मेघवाल

महत्वपूर्ण अस्वीकरण (Disclaimer): यह संपूर्ण लेख सामान्य मार्गदर्शन और विभागीय जानकारी साझा करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी प्रकार के तकनीकी संशय, आवेदन प्रारूप या विधिक दावे के लिए राजस्थान सरकार के वित्त विभाग और कार्मिक विभाग द्वारा समय-समय पर जारी मूल अधिसूचनाओं, RSR नियमों और "अनुकम्पा नियुक्ति नियम 1996" के प्रामाणिक सरकारी दस्तावेज़ों का ही गहराई से अध्ययन करें.