राजस्थान सरकार वित्त विभाग नियम 2026

Rajasthan House Rent Allowance (HRA) Rules 2026

राजस्थान राज्य कर्मचारियों के मकान किराया भत्ता (HRA) की दरें, पात्रता नियम, शहर वर्गीकरण, अधिसूचनाएं और HRA आयकर छूट कैलकुलेटर की संपूर्ण मार्गदर्शिका।

महत्वपूर्ण अपडेट: HRA संशोधित दरें लागू (20% और 10%) राजस्थान सरकार ने हाल ही में राज्य कर्मचारियों के लिए संशोधित मकान किराया भत्ता (HRA) दरों को प्रभावी किया है। वर्तमान में महंगाई भत्ता (DA) 60% है। हालांकि, केंद्रीय कर्मचारियों के विपरीत राजस्थान में HRA महंगाई भत्ते के बढ़ने से स्वतः संशोधित नहीं होता, बल्कि वित्त विभाग के अलग आदेश से बदलता है।

मकान किराया भत्ता (HRA) राजस्थान सरकार के कर्मचारियों को दिए जाने वाले महत्वपूर्ण भत्तों में से एक है। वित्त विभाग (Gr.2) की अधिसूचना संख्या F.12(2)FD(Gr.2)/89 दिनांक 03.10.1989 (31.12.2007 तक संशोधित) के तहत राज्य कर्मचारियों के लिए HRA नियमों का निर्धारण किया जाता है। राजस्थान में वर्तमान में HRA दरें मूल वेतन (Basic Pay) का 20% और 10% हैं।

क्विक गाइड हाइलाइट्स
  • जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर = 20% HRA (Y)
  • अन्य सभी स्थान = 10% HRA (Z)
  • आवास आवंटन के 8 दिन के भीतर HRA स्वतः बंद हो जाता है।
  • अवकाश की स्थिति में 120 दिनों तक HRA निरंतर जारी रहता है।
  • गंभीर बीमारियों के अवकाश पर सीमा 240 दिनों तक है।

1. राजस्थान में मकान किराया भत्ता (HRA) की वर्तमान दरें

राज्य सरकार द्वारा वर्तमान में लागू की गई मकान किराया भत्ते (HRA) की दरें निम्नानुसार हैं:

शहरों की श्रेणी (Class of Cities) संशोधित HRA दरें (% of Basic Pay) शामिल शहर व कस्बे (Applicable Cities)
Y श्रेणी (Y-Category) 20% जयपुर (Jaipur), जोधपुर (Jodhpur), कोटा (Kota), अजमेर (Ajmer), बीकानेर (Bikaner) (शहरी सीमाएं/UA)
Z श्रेणी (Z-Category) 10% Y श्रेणी के अतिरिक्त राजस्थान के अन्य सभी वर्गीकृत शहर, कस्बे, तहसील मुख्यालय और ग्रामीण क्षेत्र

HRA एवं आयकर (Income Tax) छूट कैलकुलेटर

अपनी बेसिक पे और शहर के अनुसार HRA एवं आयकर छूट का त्वरित आकलन करें।

HRA की लागू दर (HRA Rate): 10%
अनुमानित मासिक HRA: ₹3,500
अनुमानित वार्षिक HRA: ₹42,000
* सूचना: वर्तमान में महंगाई भत्ता (DA) मूल वेतन का 60% (₹21,000) है, जो इस भत्ते को प्रभावित नहीं करता।

2. राजस्थान मकान किराया भत्ता (HRA) नियम - मूल अधिसूचना

नीचे दिए गए नियम Rajasthan House Rent Allowance Rules, 1989 (संशोधित 31.12.2007 तक) के मूल अध्यायों के अनुसार हैं:

Rule 1: Applicability (नियमों का लागू होना)

(1) यह नियम राजस्थान सरकार के सभी सरकारी कर्मचारियों (Government servants) पर लागू होंगे।

(2) यह नियम निम्न पर लागू नहीं होंगे:

  • दैनिक वेतनभोगी (Daily wages) या कार्य-प्रभारित (Work-charged) कर्मचारी।
  • अनुबंध (Contract) पर नियुक्त अधिकारी, जब तक कि अनुबंध की शर्तों में HRA की स्वीकार्यता का विशेष प्रावधान न हो।

(3) यह नियम तुरंत प्रभाव (03.10.1989) से लागू हुए थे।

Rule 2: Definitions (मुख्य परिभाषाएं)

इन नियमों के प्रयोजन हेतु:

(1) Basic Pay (मूल वेतन): इसका अर्थ राजस्थान सेवा नियम (RSR) के नियम 7(24)(i) में परिभाषित वेतन से है।

नोट (ऐतिहासिक): 01.09.1996 से पूर्व के वेतनमान में वेतन पाने वाले कर्मचारियों हेतु संशोधित वेतनमान में बेसिक पे के साथ दिनांक 01.01.1996 को देय महंगाई भत्ता (DA) तथा अंतरिम राहत (Interim Relief) की प्रथम व द्वितीय किस्त शामिल मानी गई थी।

(2) Family (परिवार): सरकारी कर्मचारी का पति/पत्नी, संतान और उसके साथ रहने वाले तथा पूरी तरह उस पर आश्रित व्यक्ति। स्वतंत्र आय का स्रोत रखने वाले आश्रित नहीं माने जाते, सिवाय इसके कि जिनकी पेंशन (या सेवानिवृत्ति लाभ) ₹500 प्रति माह से अधिक न हो।

(3) Government (सरकार): राजस्थान सरकार (Government of Rajasthan)।

Rule 3: When HRA Not Admissible (HRA कब देय नहीं होगा)

निम्नलिखित परिस्थितियों में सरकारी कर्मचारी को मकान किराया भत्ता (HRA) देय नहीं होगा:

  • (1) (a) यदि वह सरकार के स्वामित्व वाले, लीज पर लिए गए या अधिग्रहित आवास अथवा सब्सिडी दरों पर सरकारी भवनों (जैसे सर्किट हाउस, डाक बंगले, सरकारी हॉस्टल आदि) में रह रहा हो।
  • (1) (b) देवस्थान विभाग या किसी अन्य सरकारी विभाग के स्वामित्व वाले आवास में रहने पर।
  • (1) (c) UIT, नगर पालिका, स्थानीय निकाय या किसी स्वायत्तशासी संस्था के आवास में रहने पर।
  • (2) सरकारी आवास के आवंटन को स्वीकार करने पर, आवास पर कब्जा करने की तिथि से या आवंटन आदेश के 8वें दिन से (जो भी पहले हो)।
  • (3) (a) यदि वह किसी अन्य कर्मचारी को आवंटित किराया-मुक्त सरकारी आवास साझा करता है, या अपने पति/पत्नी/माता-पिता/पुत्र/पुत्री को सरकार/सार्वजनिक उपक्रम/स्वायत्त निकाय या नगर पालिका द्वारा आवंटित आवास में रहता है।
  • (3) (b) यदि पति/पत्नी में से किसी को भी केंद्र सरकार, राज्य सरकार या स्वायत्त निकायों द्वारा उसी स्टेशन (मुख्यालय) पर पारिवारिक आवास आवंटित किया गया है।
Rule 4: When Admissible (HRA कब देय होगा)

(1) किराए के मकान में रहने पर:

(i) किराए के मकान में रहने वाले कर्मचारी नियम 5 की दरों के अनुसार HRA के हकदार होंगे।

(ii) यह भत्ता इस आशय का प्रमाणपत्र देने पर देय होगा कि वे किराए पर खर्च या योगदान कर रहे हैं। यदि आवास का कोई हिस्सा सब-लेट (उप-किराए पर) दिया गया है और उससे मिलने वाला किराया कर्मचारी द्वारा दिए जाने वाले किराए के बराबर या अधिक है, तो HRA देय नहीं होगा।

(2) स्वयं के मकान में रहने पर:

अपने स्वयं के मकान, पति/पत्नी, संतान, माता/पिता के स्वामित्व वाले मकान या हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के मकान में रहने पर भी कर्मचारी नियम 5 की दरों पर HRA का हकदार होगा। इसके लिए यह प्रमाणपत्र देना होगा कि वह गृह कर (Property Tax) या मकान के रखरखाव में योगदान/व्यय कर रहा है।

स्पष्टीकरण: राजस्थान हाउसिंग बोर्ड से किराया-खरीद (Hire Purchase) के आधार पर खरीदे गए मकान को इस नियम के तहत स्वयं का मकान माना जाएगा।

(3) पति-पत्नी दोनों के राजकीय सेवा में होने पर:

यदि पति और पत्नी दोनों एक ही स्टेशन पर सरकारी सेवा में कार्यरत हैं और एक साथ किराए या स्वयं के मकान में रह रहे हैं, तो दोनों कर्मचारी पात्रता प्रमाणपत्र और आवेदन प्रस्तुत करने पर मकान किराया भत्ता (HRA) पाने के पात्र हैं।

(4) आवेदन की समय सीमा:

मकान पर कब्जा करने की तिथि से HRA स्वीकृत किया जाएगा यदि आवेदन 1 महीने के भीतर प्रस्तुत किया जाता है। यदि आवेदन कब्जा करने के 1 महीने बाद किया जाता है, तो यह आवेदन की तिथि से देय होगा।

(5) मुख्यालय पर स्वयं का मकान होने पर भी किराए पर रहने पर:

यदि किसी कर्मचारी का अपनी ड्यूटी स्टेशन पर स्वयं का मकान है, लेकिन वह किसी कारणवश किराए के मकान में रहता है, तो उसे किराए के मकान के संबंध में HRA देय होगा।

Rule 5: City Classification & Historical Rates (शहर वर्गीकरण व ऐतिहासिक दरें)

ऐतिहासिक रूप से राजस्थान मकान किराया भत्ता नियमों के तहत शहरों को B-1, B-2 और C श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था। वर्तमान में यह वर्गीकरण संकुचित होकर Y (20%) और Z (10%) में परिवर्तित हो चुका है। मूल अधिसूचना के तहत शहर वर्गीकरण की सूची निम्नलिखित थी:

B-1 श्रेणी के शहर (15%*) B-2 श्रेणी के शहर (15%*) C श्रेणी के शहर व कस्बे (7.5%*)
जयपुर (Jaipur UA) अजमेर (Ajmer UA), बीकानेर (Bikaner), जोधपुर (Jodhpur), कोटा (Kota UA) अलवर, भरतपुर, बांसवाड़ा, ब्यावर, बूंदी, बाड़मेर, भीलवाड़ा, बारां, चुरू, चित्तौड़गढ़, धौलपुर, फतेहपुर, गंगापुर सिटी, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, हिंडौन, झुंझुनू, किशनगढ़, मकराना, माउंट आबू, नागौर, नवलगढ़, पाली, रतनगढ़, सवाई माधोपुर, सीकर, सरदारशहर, सुजानगढ़, टोंक, उदयपुर, बड़ी (बारी), बालोतरा, चोमू, दौसा, जैसलमेर, करौली, कुचामन सिटी, लाडनूं, निम्बाहेड़ा, राजसमंद, सूरतगढ़।

* उपरोक्त दरें 7वें वेतन आयोग से पूर्व की अधिसूचना के अनुसार ऐतिहासिक संदर्भ के लिए हैं। वर्तमान में Y श्रेणी के शहरों में 20% और Z श्रेणी (अन्य सभी स्थानों) में 10% HRA प्रभावी है।

📌 ऐतिहासिक वेतनमान दरें (1993/1998 के वेतनमान अनुसार)

संशोधनों के अनुसार मूल रूप से देय मासिक HRA की निश्चित राशियां (रुपये में) निम्न तालिका अनुसार थीं:

वेतन सीमा (Basic Pay Range) जयपुर, अजमेर, जोधपुर व बीकानेर सीमा में (₹/माह) अन्य श्रेणी B-2/C शहरों में (₹/माह) अन्य ग्रामीण/अवर्गीकृत स्थानों पर (₹/माह)
Below ₹950/- 150/- 70/- 30/-
₹950/- and above but below ₹1500/- 250/- 120/- 50/-
₹1500/- and above but below ₹2800/- 450/- 220/- 100/-
₹2800/- and above but below ₹3600/- 600/- 300/- 150/-
₹3600/- and above but below ₹4500/- 800/- 400/- 200/-
₹4500/- and above 1000/- 500/- 300/-
Rule 6: Regulation in Special Circumstances (विशेष परिस्थितियों में HRA नियमन)

विभिन्न परिस्थितियों में HRA का भुगतान निम्न नियमों के अनुसार विनियमित किया जाता है:

  • (a) छुट्टी या अस्थायी स्थानांतरण के दौरान (During Leave or Temporary Transfer): कर्मचारी छुट्टी पर जाने से ठीक पूर्व जिस दर पर HRA प्राप्त कर रहा था, उसी दर पर अवकाश काल में भी HRA का हकदार होगा।
    नोट 1: छुट्टी की कुल अवधि 120 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए। 120 दिन से अधिक होने पर प्रथम 120 दिनों के लिए ही देय होगा।
    नोट 2 (चिकित्सा आधार): टीबी, कैंसर, कुष्ठ रोग या मानसिक बीमारी से पीड़ित कर्मचारियों के मामले में यह सीमा चिकित्सा प्रमाणपत्र के आधार पर बढ़ाकर 240 दिन तक की जा सकती है।
    अस्थायी स्थानांतरण: अस्थायी स्थानांतरण/डेपुटेशन की अवधि 4 माह से अधिक न होने पर HRA पूर्ववत देय होगा।
  • (b) कार्यग्रहण काल के दौरान (During Joining Time):
    (i) कर्मचारी को कार्यग्रहण काल (Joining Time) के दौरान पुराने स्टेशन की दर पर ही HRA देय होगा।
    (ii) यदि स्थानांतरण पर कर्मचारी अपने परिवार को पुराने स्टेशन पर ही छोड़ देता है क्योंकि नए स्टेशन पर उसे कोई किराए/स्वयं का मकान या सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हुआ है, तो वह 6 महीने की अवधि तक पुराने स्टेशन की दर पर ही HRA प्राप्त कर सकेगा।
  • (c) पदस्थापन आदेशों की प्रतीक्षा में (During Awaiting Posting Orders): यदि प्रतीक्षा अवधि (APO Period) को कर्तव्य (Duty) माना जाता है, तो कर्मचारी इस अवधि के दौरान HRA पाने का हकदार है।
  • (d) भारत के भीतर प्रशिक्षण के दौरान (During Training within India): यदि प्रशिक्षण अवधि को RSR के नियम 7(8)(b)(i) के तहत कर्तव्य माना जाता है, तो पूर्व दर पर HRA देय होगा, बशर्ते (i) उसने परिवार पुराने स्टेशन पर रखा हो, या (ii) उसे प्रशिक्षण संस्थान द्वारा निःशुल्क/सब्सिडी वाला आवास न दिया गया हो।
  • (e) विदेश में प्रशिक्षण (During Training Abroad): राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के तहत विदेश भेजे गए कर्मचारियों को प्रशिक्षण की पूरी अवधि के दौरान पूर्व मुख्यालय की दर पर HRA देय होगा।
  • (f) पुनर्नियुक्ति के दौरान (During Re-employment): HRA का नियमन निम्नानुसार होगा:
    (i) यदि पुनर्नियुक्ति पर वेतन + पेंशन पद के अधिकतम वेतन से अधिक है, तो भत्ता उस अधिकतम सीमा पर ही निकाला जाएगा।
    (ii) यदि पेंशन का कुछ हिस्सा वेतन निर्धारण में छोड़ दिया गया है, तो उसे HRA की गणना हेतु वेतन में नहीं जोड़ा जाएगा।
    (iii) अन्य मामलों में HRA की गणना वेतन + सकल पेंशन (Gross Pension) के योग पर की जाएगी।
  • (g) निलंबन की अवधि के दौरान (During Suspension): निलंबित कर्मचारी को निलंबन की तिथि पर प्राप्त होने वाली दर से HRA देय होगा (RSR के नियम 53(b) के अधीन)।
    नोट 1: यदि सार्वजनिक हित में निलंबित कर्मचारी का मुख्यालय बदल दिया जाता है, तो वह नए स्टेशन की दरों पर HRA का हकदार होगा। गणना निलंबन के समय के वेतन पर की जाएगी।
    नोट 2: यदि मुख्यालय कर्मचारी के स्वयं के अनुरोध पर बदला जाता है, तो पुराने स्टेशन अथवा नए स्टेशन में से जो भी HRA दर कम होगी, वह देय होगी।
Rule 7: Posted Outside the State (राज्य से बाहर तैनात कर्मचारी)

राजस्थान राज्य से बाहर पदस्थापित राज्य कर्मचारियों के लिए HRA का निर्धारण निम्नानुसार होता है:

(1) यदि राज्य सरकार द्वारा बाहरी राज्य में आवास उपलब्ध कराया गया है, तो कर्मचारी से राजस्थान सिविल सेवा (आवास किराया निर्धारण और वसूली) नियम, 1958 के तहत किराया लिया जाएगा।

(2) यदि आवास उपलब्ध नहीं कराया गया है, तो कर्मचारी केंद्रीय सरकारी नियमों के अनुसार अथवा संबंधित राज्य (जहां वह तैनात है) के नियमों के अनुसार, जो भी उसके लिए अधिक लाभकारी (Advantageous) हो, उस दर से HRA प्राप्त करने का अधिकारी होगा।

Rule 8 & 9: Certificates and Claim Procedure (प्रमाणपत्र और आवेदन प्रक्रिया)

Rule 8: Certificates Required (आवश्यक प्रमाणपत्र)

(1) प्रथम दावा (First Claim): प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को अपने प्रथम HRA दावे के साथ 'अनुलग्नक-बी' (Annexure 'B') के रूप में पात्रता घोषणा पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है। घोषणा की परिस्थितियों में परिवर्तन होने पर तुरंत नया प्रमाणपत्र देना होगा।

(2) आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) का दायित्व: DDO प्रतिवर्ष **जनवरी** और **जुलाई** माह के स्थापना वेतन बिलों पर निम्नलिखित प्रमाणपत्र अनिवार्य रूप से अंकित करेंगे:

"प्रमाणित किया जाता है कि जिन कर्मचारियों के लिए इस बिल में मकान किराया भत्ता आहरित किया जा रहा है, उन्हें सरकारी आवास उपलब्ध नहीं कराया गया है।"

Rule 9: Grant Procedure (स्वीकृति की प्रक्रिया)

(1) आवेदन पत्र: पात्रता रखने वाले कर्मचारी को 'अनुलग्नक-ए' (Annexure 'A') प्रारूप में अपने कार्यालय अध्यक्ष (Head of Office) को आवेदन करना होगा। यदि आवेदक स्वयं कार्यालय अध्यक्ष/विभागाध्यक्ष है, तो वह अपने से उच्च प्रशासनिक अधिकारी को आवेदन भेजेगा।

(2) आवास आवंटन अधिकारी को प्रेषण: कार्यालय अध्यक्ष आवेदन की एक प्रति आवास आवंटन प्राधिकारी को भेजेंगे ताकि कर्मचारी का नाम आवास पात्रता सूची में दर्ज किया जा सके। मकान किराया भत्ते की स्वीकृति बिना आवास की अनुपलब्धता प्रमाणपत्र (Non-availability Certificate) की प्रतीक्षा किए तुरंत जारी की जाएगी।

3. राजस्थान वित्त विभाग के महत्वपूर्ण आदेश व निर्णय

मकान किराया भत्ते के सुचारू संचालन और विशेष परिस्थितियों के लिए वित्त विभाग द्वारा समय-समय पर जारी किए गए चुनिंदा ऐतिहासिक आदेश:

आदेश दिनांक (Order Date) विषय (Subject) मुख्य प्रावधान (Key Provision)
05.11.1993 / 25.07.1998 पटवारियों को कार्यालय भत्ता (Office Allowance to Patwaris) पटवारियों को पटवार घर किराए पर लेने हेतु सामान्य HRA के अतिरिक्त **₹90 प्रति माह** (पूर्व में ₹30/-) का विशेष कार्यालय भत्ता देय।
16.09.1993 एरियर समायोजन (Arrears Adjustment) 1991 के आदेश पूर्वव्यापी प्रभाव (01.03.1991) से लागू किए गए तथा बढ़े हुए भत्ते के एरियर की राशि कर्मचारियों के जीपीएफ (GPF) खाते में जमा की गई।
17.02.1998 वेतनमान संशोधन प्रभाव (Revision of Pay Scales w.e.f. 1-9-1996) 1.9.1996 के वेतन संशोधन के उपरांत राज्य कर्मचारियों को आगामी आदेशों तक पुराने पूर्व-संशोधित वेतनमान के काल्पनिक वेतन (Notional Pay) के आधार पर ही HRA का भुगतान जारी रखा गया।

4. मकान किराया भत्ता (HRA) - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: राजस्थान में वर्तमान में HRA किस दर से मिलता है और इसके शहर कैसे वर्गीकृत हैं?
उत्तर: राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्तमान में दो दरें लागू हैं: 20% और 10%। 'Y' श्रेणी के शहरों (जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर) में पदस्थापित कर्मचारियों को मूल वेतन का 20% तथा शेष राज्य (Z श्रेणी) में 10% HRA मिलता है।
प्रश्न: क्या पति और पत्नी दोनों एक ही मुख्यालय पर कार्यरत होने पर HRA के लिए पात्र हैं?
उत्तर: हाँ, राजस्थान मकान किराया भत्ता नियम 4(3) के अनुसार यदि पति और पत्नी दोनों सरकारी सेवा में एक ही स्टेशन पर हैं और साथ रह रहे हैं, तो आवश्यक प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर दोनों कर्मचारी अपना स्वतंत्र HRA प्राप्त कर सकते हैं।
प्रश्न: क्या निलंबित (Suspended) कर्मचारी को निलंबन अवधि में HRA का भुगतान किया जाता है?
उत्तर: हाँ, निलंबित कर्मचारी को निलंबन की तारीख पर मिलने वाली दर के आधार पर निलंबन काल में भी मकान किराया भत्ता देय होता है (नियम 53(b) के आवश्यक प्रमाणपत्रों के प्रस्तुत करने पर)।
प्रश्न: आयकर छूट की गणना में प्रयुक्त 'वेतन' (Salary) शब्द से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: आयकर अधिनियम की धारा 10(13A) के तहत HRA छूट की गणना हेतु वेतन का अर्थ **'मूल वेतन (Basic Pay) + महंगाई भत्ता (DA)'** है, बशर्ते महंगाई भत्ता सेवा शर्तों के तहत सेवानिवृत्ति लाभों (Retirement Benefits) का हिस्सा बनता हो। यदि नहीं, तो केवल मूल वेतन को ही आधार माना जाता है। राजस्थान में सामान्यतः राज्य कर्मचारियों के लिए केवल बेसिक पे पर ही गणना की जाती है।